Tata Mumbai Marathon 2026: तेज़ म्यूज़िक और शोर पर स्थानीय लोगों की नाराज़गी

Tata Mumbai Marathon 2026 खेल भावना और फिटनेस के संदेश के साथ आयोजित किया गया, लेकिन इस बार आयोजन को लेकर स्थानीय निवासियों की नाराज़गी भी सामने आई है। मैराथन के दौरान बजाए गए तेज़ म्यूज़िक और लगातार शोर को लेकर कई इलाकों के लोगों ने शिकायत की है।

शोर प्रदूषण को लेकर उठे सवाल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मैराथन रूट के आसपास बहुत तेज़ आवाज़ में म्यूज़िक बजाया गया, जिससे सुबह के समय गंभीर असुविधा हुई। कुछ लोगों ने इसे “बेहद परेशान करने वाला” बताया और कहा कि इससे बुज़ुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को दिक्कत हुई।

रिहायशी इलाकों में लंबे समय तक शोर बने रहने से नींद में खलल और मानसिक तनाव की शिकायतें भी सामने आईं।

आयोजकों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप

शिकायत करने वालों का कहना है कि इतने बड़े आयोजन में शोर प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन सख्ती से किया जाना चाहिए था। उनका आरोप है कि तय सीमा से ज्यादा आवाज़ में म्यूज़िक और साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।

कुछ निवासियों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या आयोजन से पहले स्थानीय लोगों को पर्याप्त जानकारी और अनुमति प्रक्रिया के बारे में बताया गया था।

आयोजन बनाम आम लोगों की परेशानी

जहां एक ओर Tata Mumbai Marathon को शहर के लिए प्रतिष्ठित इवेंट माना जाता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि खेल आयोजन के नाम पर आम नागरिकों की सुविधा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए

उनका मानना है कि बेहतर प्लानिंग और आवाज़ पर नियंत्रण से इस तरह की समस्या से बचा जा सकता था।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

नाराज़ स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  • भविष्य में शोर सीमा का सख्ती से पालन हो
  • रिहायशी इलाकों में म्यूज़िक की आवाज़ कम रखी जाए
  • आयोजन से पहले स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं

इस मुद्दे को लेकर संबंधित विभागों तक शिकायतें पहुंचाई गई हैं।

आयोजकों के लिए सबक

यह विवाद आयोजकों के लिए एक संकेत माना जा रहा है कि बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में स्थानीय समुदाय की सहमति और सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शहर में इस तरह के आयोजनों की सफलता तभी मानी जाएगी जब वे उत्सव और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखें।

साफ बात

Tata Mumbai Marathon 2026 ने जहां एक ओर खेल और फिटनेस का संदेश दिया, वहीं तेज़ म्यूज़िक और शोर को लेकर उठी नाराज़गी ने शोर प्रदूषण जैसे अहम मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। आने वाले आयोजनों में इस अनुभव से सबक लेना जरूरी होगा।

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