आज, 12 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार में दबाव का माहौल बना हुआ है। कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। सेंसेक्स आज, निफ्टी आज, और मार्केट टुडे पर नज़र रखने वालों को ज्यादातर सेक्टरों में सुस्त कारोबार दिख रहा है।

सेंसेक्स आज और निफ्टी 50 का हाल
BSE सेंसेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहा है। बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के चलते इंडेक्स पर दबाव बना हुआ है। वहीं निफ्टी 50 भी कमजोर दिख रहा है और अहम सपोर्ट स्तरों के आसपास संघर्ष कर रहा है।
जो निवेशक निफ्टी 50 शेयर प्राइस और सेंसेक्स शेयर प्राइस पर नज़र रख रहे हैं, उन्हें हर तेजी के प्रयास पर बिकवाली देखने को मिल रही है।
GIFT निफ्टी से पहले ही मिले थे संकेत
प्री-ओपन सेशन में GIFT निफ्टी ने फ्लैट से कमजोर शुरुआत के संकेत दिए थे, जो घरेलू बाजार में भी देखने को मिले। अस्थिर बाजार में GIFT निफ्टी अल्पकालिक दिशा समझने का अहम संकेतक माना जाता है।
आईटी शेयर और प्रमुख स्टॉक्स फोकस में
आज आईटी शेयरों पर खास नजर है। वैश्विक टेक सेक्टर से जुड़े संकेतों के चलते निवेशक TCS और HCL Tech जैसे शेयरों को ध्यान से देख रहे हैं। हालांकि कुछ शेयरों में हल्की रिकवरी की कोशिश दिखी, लेकिन कुल मिलाकर आईटी सेक्टर में सतर्कता बनी हुई है।
बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में भी दबाव है, जिससे बाजार की कमजोरी और बढ़ी है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट ज्यादा देखने को मिल रही है।
आज शेयर बाजार दबाव में क्यों है
वैश्विक बाजारों की कमजोरी, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रही है।
घरेलू स्तर पर निवेशक आगामी तिमाही नतीजों से पहले भी सतर्क रुख अपना रहे हैं।
निवेशकों की आगे की रणनीति
निवेशक निफ्टी और सेंसेक्स के इंट्राडे सपोर्ट स्तरों पर नजर बनाए हुए हैं। अगर वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है या विदेशी बिकवाली में कमी दिखती है, तो बाजार में कुछ राहत मिल सकती है।
द इकोनॉमिक टाइम्स जैसे बिजनेस प्लेटफॉर्म्स पर निवेशक सेक्टर और स्टॉक आधारित अपडेट्स पर भी ध्यान दे रहे हैं।
अंतिम बात
आज का शेयर बाजार सतर्कता के संकेत दे रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही दबाव में हैं और जब तक मजबूत संकेत नहीं मिलते, तब तक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए चयनात्मक रणनीति और अनुशासित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
